दमोह में काफिले पर सवाल पूछने से भड़के मंत्री इंदर सिंह परमार, पत्रकार से बोले— “अपना दिमाग ठीक रखें”, माफी की उठी मांग !

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मध्य प्रदेश के दमोह जिले में गुरुवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब प्रभारी मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार एक पत्रकार के सवाल पर भड़क गए। पत्रकार द्वारा उनके कथित बड़े काफिले को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप अपना दिमाग ठीक रखें।” इस बयान के बाद मामला तूल पकड़ गया है और पत्रकार संगठनों ने मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

यह घटना उस समय हुई जब मंत्री परमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीजल और पेट्रोल बचाने की अपील के बाद भोपाल से ट्रेन द्वारा दमोह पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वे बुधवार रात ट्रेन से भोपाल से रवाना होकर दमोह पहुंचे थे। अगले दिन गुरुवार को उनका जिला स्तरीय कार्यक्रमों में व्यस्त शेड्यूल था, जिसमें एक अहम बैठक और जेल परिसर में नई बैरक का उद्घाटन शामिल था।

गुरुवार को मंत्री परमार ने जिला कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया। बैठक समाप्त होने के बाद वे सर्किट हाउस पहुंचे, जहां पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया था। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विवाद की शुरुआत हुई।

काफिले को लेकर सवाल और बहस की शुरुआत

प्रेस वार्ता में एक पत्रकार ने मंत्री से सवाल किया कि वे भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में हुई एक बैठक के लिए कथित तौर पर बड़े काफिले के साथ पहुंचे थे। पत्रकार का सवाल सीधा था—क्या मंत्री के साथ बड़ी संख्या में वाहन थे, और यदि हां तो उसका औचित्य क्या था, खासकर तब जब हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचत की अपील की गई है।

इस सवाल पर मंत्री परमार ने शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा कि उनके साथ केवल एक सरकारी वाहन और एक पायलट वाहन था। लेकिन जब पत्रकार ने अन्य वाहनों के बारे में स्पष्टता मांगी, तो मंत्री का जवाब थोड़ा सख्त हो गया।

उन्होंने कहा कि कलेक्टर को भी बैठक में शामिल होना था और वह बिना वाहन के नहीं आ सकते। इसके बाद मंत्री ने यह भी कहा कि विभिन्न मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के वाहन साथ में थे, जिनमें धर्मेंद्र सिंह लोधी, लखन पटेल और सांसद राहुल सिंह के वाहन शामिल थे।

मंत्री ने यह भी दावा किया कि जिस कार्यक्रम का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें कोई अतिरिक्त या अनावश्यक वाहन शामिल नहीं थे। उनके अनुसार, केवल उन्हीं लोगों के वाहन काफिले में थे जो आधिकारिक बैठकों या कार्यक्रमों में शामिल होने वाले थे।

“दिमाग ठीक रखें” बयान से बढ़ा विवाद

जब पत्रकार ने लगातार काफिले की संख्या और औचित्य पर सवाल पूछे, तो मंत्री परमार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि “बड़े काफिले का मतलब यह नहीं होता कि अनावश्यक लोग साथ चल रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों की बैठक में आवश्यकता थी, वे ही साथ थे और किसी तरह का अतिरिक्त दबाव या अनावश्यक भीड़ नहीं थी।

इसी दौरान मंत्री ने आपा खोते हुए पत्रकार से कहा, “आप अपने दिमाग को जरा ठीक रखें।” यह बयान कैमरों में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

इस टिप्पणी के बाद प्रेस वार्ता का माहौल तनावपूर्ण हो गया। वहां मौजूद अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी स्थिति को संभालने की कोशिश करते नजर आए।

कार्यक्रम में कई नेता मौजूद थे

जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान मंच या स्थान पर कई अन्य राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां भी मौजूद थीं। इनमें मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, सांसद राहुल सिंह, हटा विधायक उमा देवी खटीक और भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे शामिल थे। सभी की मौजूदगी में यह बहस और अधिक चर्चा का विषय बन गई।

पत्रकार की प्रतिक्रिया और माफी की मांग

इस घटना के बाद संबंधित पत्रकार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह शासन द्वारा आयोजित एक आधिकारिक प्रेस वार्ता में शामिल थे और उन्होंने केवल जनहित से जुड़ा सवाल पूछा था। पत्रकार ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सवाल का जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणी की, जिससे वह आहत हुए हैं।

पत्रकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल पेशेवर सवाल था और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार से अपमान करना नहीं था। उन्होंने मांग की कि मंत्री इंदर सिंह परमार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस के सवालों का सम्मानपूर्वक जवाब देना जिम्मेदारी होती है।

पत्रकार संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और कहा है कि जनप्रतिनिधियों को प्रेस की स्वतंत्रता और सवाल पूछने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि जब मंत्री से ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने आक्रामक प्रतिक्रिया दी, जो उचित नहीं है।

हालांकि, सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि काफिले का उपयोग पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार था और इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

मामला चर्चा में क्यों?

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक जीवन में ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की लगातार अपील की जा रही है। ऐसे में किसी भी बड़े काफिले या प्रशासनिक खर्च को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जनप्रतिनिधियों और मीडिया के बीच संवाद की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। एक ओर जहां पत्रकारों का काम सवाल पूछना है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे संयम और शालीनता के साथ जवाब दें।

दमोह की यह घटना केवल एक प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजनीतिक और मीडिया दोनों क्षेत्रों में बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या मंत्री इंदर सिंह परमार इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण या सार्वजनिक बयान जारी करते हैं या नहीं, और क्या पत्रकार की माफी की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।

फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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