भोपाल। राजधानी भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। जानकारी के अनुसार स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम अगले दो दिनों के भीतर शहर का दौरा कर सकती है। इसे देखते हुए भोपाल नगर निगम ने शहरभर में सफाई, सौंदर्यीकरण और विजिबल क्लीनलीनेस को लेकर विशेष अभियान शुरू कर दिया है।
इसी कड़ी में सोमवार को जोन-9 के पंजाबी बाग क्षेत्र की एक गली में समुद्र थीम पर आकर्षक पेंटिंग बनाई गई, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। गली में बनाई गई समुद्री आकृतियां, लहरें और रंगीन कलाकृतियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नगर निगम द्वारा शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी करीब 40 पेंटिंग तैयार कराई गई हैं।
जमीन पर सफाई दिखाना सबसे बड़ी चुनौती
इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि शहरों को जमीन पर वास्तविक सफाई भी साबित करनी होगी। इसी कारण निगम सड़कों की सफाई, नालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव और बैक लेन सुधार पर विशेष ध्यान दे रहा है।

भोपाल नगर निगम द्वारा न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराने शहर, करोंद, कोलार और बैरागढ़ जैसे प्रमुख बाजारों में सफाई और सौंदर्यीकरण कार्य तेज कर दिए गए हैं। बाजारों में टाइल्स लगाने, कचरा हटाने और रंगरोगन का काम भी जारी है।
हालांकि, शहर के कई हिस्सों में अब भी गंदगी, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में विजिबल क्लीनलीनेस के लिए निर्धारित 1500 अंक भोपाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
10 इंडिकेटर्स पर तय होगी रैंकिंग
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार इस बार शहरों की रैंकिंग 10 प्रमुख इंडिकेटर्स के आधार पर तय की जाएगी। इनमें ऑन-ग्राउंड असेसमेंट, सिटीजन फीडबैक, विजिबल क्लीनलीनेस, ODF++, वाटर प्लस और कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग जैसे पैरामीटर शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और सिटीजन फीडबैक के लिए सबसे ज्यादा अंक निर्धारित किए गए हैं। इसीलिए निगम नागरिकों को बेहतर फीडबैक देने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।
बाजारों में कचरा बना बड़ी परेशानी
स्वच्छ सर्वेक्षण में बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों की सफाई को लेकर सख्त मानक तय किए गए हैं। आवासीय क्षेत्रों और पार्कों में रोजाना एक बार सफाई जरूरी होगी, जबकि व्यावसायिक क्षेत्रों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई करनी होगी।
इसके लिए 300 अंक निर्धारित हैं। लेकिन कई बाजारों में अब भी कचरे और गंदगी की समस्या बनी हुई है। निगम के लिए यह बड़ा चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।
बैक लेन और दीवारों पर खास फोकस
घरों और दुकानों के पीछे की गलियों यानी बैक लेन की सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय किए गए हैं। इसी वजह से शहर के कई इलाकों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

सार्वजनिक स्थलों और दीवारों को पान-गुटखा के दाग और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक निर्धारित हैं। लेकिन निर्माण स्थलों पर लगाए गए बैरिकेड्स कई जगह पीकदान में तब्दील हो चुके हैं। निगम ने संबंधित एजेंसियों को इन्हें साफ रखने की चेतावनी दी है।
करोड़ों की पेंटिंग, लेकिन सड़कें अब भी खराब
शहर में वेस्ट-टू-आर्ट, म्यूरल्स, हरियाली बढ़ाने और सड़कों को गड्ढामुक्त करने जैसे कार्यों के लिए भी अंक निर्धारित हैं। नगर निगम द्वारा करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से वॉल पेंटिंग कराई जा रही है।
इसके बावजूद शहर की कई सड़कें अब भी उखड़ी हुई हैं। पिछली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के दौरान भी सड़क सुधार पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन कई क्षेत्रों में सड़कें फिर खराब हो चुकी हैं।
स्लम क्षेत्रों और स्कूलों के आसपास गंदगी
स्लम क्षेत्रों की सफाई और ढके हुए नालों के लिए 150 अंक तय किए गए हैं, जबकि स्कूल परिसरों को कचरा मुक्त रखने के लिए 100 अंक निर्धारित हैं।
शहर के कई नालों के आसपास अब भी गंदगी जमा है। रवींद्र भवन क्षेत्र के प्रमुख नाले के आसपास भी कचरे की समस्या बनी हुई है। यहां पहले लगाई गई जालियां कई स्थानों पर टूट चुकी हैं।
आदमपुर कचरा खंती बनी सबसे बड़ी परेशानी
आदमपुर कचरा खंती इस बार भी भोपाल की स्वच्छता रैंकिंग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यहां वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट का निपटान अब तक पूरी तरह नहीं हो सका है।

कचरे के बड़े ढेर से लगातार बदबू और प्रदूषण फैल रहा है। इसके अलावा यहां बार-बार आग लगने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं, जिससे आसपास का वातावरण प्रभावित होता है।
पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में भी आदमपुर खंती के कारण भोपाल के अंक कटे थे। फिलहाल यहां की स्थिति में ज्यादा सुधार नजर नहीं आ रहा।
नालों की सफाई और STP निर्माण जारी
नगर निगम द्वारा शहर के नालों की सफाई का काम भी तेज किया गया है। जानकारी के अनुसार छह जोन में सफाई कार्य पूरा हो चुका है। वहीं भानपुर क्षेत्र में करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से 60 एमएलडी क्षमता का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया जा रहा है।
नगर निगम का दावा है कि इन प्रयासों से शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा और भोपाल की रैंकिंग बेहतर हो सकेगी।
अब देखना होगा कि स्वच्छ सर्वेक्षण टीम भोपाल की इन तैयारियों को कितना प्रभावी मानती है और शहर इस बार राष्ट्रीय रैंकिंग में कितना बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।