भोपाल को पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है। अब भोज महोत्सव, फूड फेस्टिवल, म्यूजिक फेस्टिवल और हेरिटेज वॉक जैसे आयोजनों के जरिए शहर की ब्रांडिंग की जाएगी। इसके साथ ही भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों, झीलों, संस्कृति और स्थानीय कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।
सोमवार को जिला पुरातत्त्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद (DATCC) की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पर्यटन विकास, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रशासन का उद्देश्य आने वाले महीनों में भोपाल को एक जीवंत सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
बैठक में “वायब्रेंट भोपाल” की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत शहर में भोज महोत्सव, फूड फेस्टिवल और म्यूजिक फेस्टिवल जैसे बड़े आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल भोपाल की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि देशभर से पर्यटकों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।

भोपाल अपनी ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और खानपान के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। शहर की बड़ी और छोटी झील, ऐतिहासिक स्मारक, पुरातात्विक स्थल और पारंपरिक व्यंजन लंबे समय से लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। अब प्रशासन इन्हीं विशेषताओं को ब्रांडिंग का माध्यम बनाकर शहर को नई पहचान देने की तैयारी कर रहा है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि भोपाल की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने के लिए फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा आर्ट एंड ड्राइंग, रील मेकिंग, शॉर्ट मूवी और लोगो डिजाइन प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से भोपाल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने DATCC की वेबसाइट, बुकलेट और लोगो तैयार करने के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए। इससे स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही परिषद की गतिविधियों को व्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप भी मिल सकेगा।

बैठक में हेरिटेज वॉक शुरू करने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। इसके तहत भोपाल के ऐतिहासिक स्थलों और पुरानी बस्तियों में गाइडेड टूर कराए जाएंगे, ताकि लोग शहर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जान सकें। प्रशासन स्थानीय गाइड व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बना रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी विशेष फोकस किया गया। अधिकारियों ने पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ प्रसाधन और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। माना जा रहा है कि यदि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो शहर की पर्यटन छवि और मजबूत होगी।
बैठक में यह भी कहा गया कि होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा स्थानीय टूरिस्ट सर्किट विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि पर्यटक एक ही यात्रा में भोपाल और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर सकें।
प्रशासन पीपीपी मॉडल यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से टूर पैकेज तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और पर्यटन गतिविधियों को पेशेवर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
बैठक के दौरान कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने राज्य संग्रहालय और मानव संग्रहालय का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों को अधिक आकर्षक और पर्यटक अनुकूल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि भोपाल की पहचान केवल प्रशासनिक राजधानी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित किया जाना चाहिए।

बैठक में स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार, जिला पंचायत सीईओ ईला तिवारी, समिति सदस्य संदीप श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। सभी ने पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को समन्वित रूप से संचालित करने पर सहमति जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो भोपाल आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन शहरों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। भोज महोत्सव और फूड फेस्टिवल जैसे आयोजन स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्प, लोक संगीत और पारंपरिक व्यंजनों को भी नया मंच प्रदान करेंगे।
शहरवासियों में भी इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को लंबे समय से जिस स्तर की पहचान मिलनी चाहिए थी, अब वह प्रयास शुरू होता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह पहल शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन उद्योग को नई दिशा दे सकती है।