पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बढ़ा संकट: 9 दिनों में तीसरी बार महंगा हुआ ईंधन, ट्रांसपोर्टर्स ने दी हड़ताल की चेतावनी !

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सागर। लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम जनता से लेकर व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स तक की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव के चलते पैदा हुए ईंधन संकट का असर अब सीधे भारतीय बाजारों में दिखाई देने लगा है। शनिवार 23 मई को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 94-94 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। पिछले 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं।

लगातार हो रही मूल्य वृद्धि के बाद अब परिवहन क्षेत्र में भी असंतोष बढ़ने लगा है। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से परेशान ट्रांसपोर्टर्स ने मालभाड़ा बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ट्रक यूनियन ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार करीब तीन वर्षों बाद 15 मई को पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी वृद्धि की गई थी। उस दिन पेट्रोल पर 3.28 रुपए और डीजल पर 3.09 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इसके बाद 19 मई को फिर से कीमतों में इजाफा किया गया और अब 23 मई को तीसरी बार 94-94 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई।

लगातार बढ़ती कीमतों के बाद सागर में सादा पेट्रोल 111.34 रुपए प्रति लीटर, स्पीड पेट्रोल 121.08 रुपए प्रति लीटर और डीजल 96.53 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर पिछले 9 दिनों में सादा पेट्रोल 5.17 रुपए, स्पीड पेट्रोल 5.16 रुपए और डीजल लगभग 4.96 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।

ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना है। दूध, सब्जी, खाद्य तेल, किराना सामान और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। साथ ही ऑटो-रिक्शा और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में भी वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

सबसे अधिक चिंता ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों में देखी जा रही है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि व्यापारी मालभाड़ा बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उनका कहना है कि केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि वाहन मेंटेनेंस, टायर, स्पेयर पार्ट्स और मिस्त्रियों के खर्च भी लगातार बढ़ गए हैं।

अमित यादव ने बताया कि ट्रांसपोर्टर्स 5 रुपए प्रति क्विंटल मालभाड़ा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर रविवार को ट्रक यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यदि व्यापारी मालभाड़ा बढ़ाने के लिए सहमत नहीं होते हैं तो यूनियन पूर्ण हड़ताल पर जा सकती है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित हड़ताल में वे सभी ट्रक मालिक शामिल होंगे जो निजी व्यापारियों और निजी परिवहन कार्यों पर निर्भर हैं। जिन ट्रांसपोर्टर्स के पास सरकारी ठेके नहीं हैं, वे लगातार बढ़ती लागत के कारण सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में बिना मालभाड़ा बढ़ाए ट्रांसपोर्ट संचालन करना मुश्किल हो गया है।

व्यापारियों और आम नागरिकों में भी इस संभावित हड़ताल को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि ट्रक यूनियन हड़ताल पर जाती है तो फल-सब्जी, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे बाजार में वस्तुओं की कमी और कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। परिवहन लागत बढ़ने से उत्पादन और वितरण दोनों महंगे हो जाते हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

सागर सहित पूरे प्रदेश में लोग बढ़ती महंगाई से पहले ही परेशान हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम परिवारों का घरेलू बजट और बिगाड़ दिया है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में महंगाई और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

अब सभी की नजर रविवार को होने वाली ट्रक यूनियन की बैठक पर टिकी हुई है। यदि ट्रांसपोर्टर्स और व्यापारियों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो शहर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होने के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।

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