सागर। मध्य प्रदेश में सामने आए चर्चित हनीट्रैप-2 मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले की कथित सरगना मानी जा रही रेशू चौधरी को लेकर हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आने के बाद अब जांच एजेंसियां उसके राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सागर के मकरोनिया क्षेत्र की एक साधारण कॉलोनी से निकलकर रेशू ने बेहद सुनियोजित तरीके से नेताओं, अफसरों और प्रभावशाली लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई थी।
रेशू चौधरी ने खुद को एक पढ़ी-लिखी और प्रभावशाली महिला के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती थी और खुद को विदेश में शिक्षित बताती थी। सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं, मंत्रियों और राजनीतिक कार्यक्रमों की तस्वीरें पोस्ट कर उसने अपने प्रभाव और पहुंच का माहौल तैयार किया। यही कारण रहा कि धीरे-धीरे उसकी पहचान राजनीतिक गलियारों में बढ़ती चली गई।

IAS कोचिंग खोलकर बनाई थी अलग पहचान
रेशू चौधरी ने सागर शहर के कटरा बाजार क्षेत्र में “ब्रह्मपुत्रा IAS एकेडमी” नाम से एक कोचिंग संस्थान शुरू किया था। इस कोचिंग के प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर पंपलेट और विज्ञापन जारी किए गए। इन प्रचार सामग्रियों में उसने खुद को “UPSC परीक्षा 2015 में प्रथम श्रेणी के पद पर चयनित” बताया था। कोचिंग में UPSC, MPPSC, SI, रेलवे, पुलिस आरक्षक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का दावा किया जाता था।
इतना ही नहीं, प्रचार में यह भी कहा गया था कि दिल्ली की एक चर्चित अकादमी के फैकल्टी द्वारा विशेष क्लास ली जाएगी। शुरुआती दिनों में यह कोचिंग चर्चा में रही, लेकिन कुछ समय बाद विवादों में घिर गई। स्थानीय स्तर पर आरोप लगे कि विज्ञापन और प्रचार-प्रसार से जुड़े लोगों को भुगतान नहीं किया गया। विवाद बढ़ने के बाद यह कोचिंग बंद हो गई।
राजनीति में बनाई सक्रिय पहचान
कोचिंग बंद होने के बाद रेशू पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गई। उसने स्थानीय बीजेपी नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू किया और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार दिखाई देने लगी। बताया जाता है कि उसने नगर निगम चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक अपनी दावेदारी जताने की कोशिश की थी। शहर में पोस्टर और होर्डिंग्स लगाकर उसने खुद को संभावित उम्मीदवार के रूप में पेश करना शुरू कर दिया था।

जानकारों के अनुसार, उसने नरयावली विधानसभा समेत कई क्षेत्रों में चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौरान उसकी पहुंच भोपाल और दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में बढ़ने लगी। सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें साझा कर वह खुद को प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा साबित करने की कोशिश करती रही।
श्वेता विजय जैन से जुड़ने के बाद बढ़ा नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019 में सामने आए चर्चित हनीट्रैप केस की आरोपी श्वेता विजय जैन से रेशू चौधरी की नजदीकियां बाद में बढ़ीं। बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद श्वेता का पुराना नेटवर्क कमजोर हो चुका था। ऐसे में रेशू के राजनीतिक और सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, दोनों ने मिलकर नेताओं, कारोबारियों, अफसरों और रईस लोगों तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की। इंदौर के कई बड़े होटलों में कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए गए और फिर इन्हीं वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग और उगाही की साजिश रची गई।
पुलिस को मिले 100 से ज्यादा वीडियो
इंदौर क्राइम ब्रांच ने रेशू चौधरी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें कई प्रभावशाली लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इन वीडियो के जरिए करोड़ों रुपए की उगाही की गई। कुछ मामलों में कथित सौदेबाजी भी चल रही थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से किसी बड़े नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
AI से बनी तस्वीरों की भी जांच
रेशू चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के साथ तस्वीरें मौजूद हैं। इनमें मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ तस्वीर भी चर्चा में रही। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि इनमें से कुछ तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक से तैयार तो नहीं की गईं।
पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि रेशू के वास्तविक संपर्क किन लोगों तक थे और उसने सोशल मीडिया का उपयोग किस हद तक अपनी छवि बनाने के लिए किया।
निजी जीवन भी विवादों में रहा
रेशू चौधरी की शादी वर्ष 2018 में रायपुर निवासी महेंद्र चौधरी से हुई थी, जो ओमान के मस्कट में ट्रेवल्स कंपनी में काम करता था। शादी के बाद रेशू भी ओमान चली गई थी, लेकिन कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। इसके बाद वह सागर लौट आई और पति तथा ससुराल पक्ष के खिलाफ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
परफ्यूम पार्सल विवाद में भी आया था नाम
फरवरी 2026 में रेशू चौधरी का नाम एक ई-कॉमर्स पार्सल विवाद में भी सामने आया था। डिलीवरी बॉय ने आरोप लगाया था कि महंगे परफ्यूम के पार्सल से सामान बदल दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, पार्सल में परफ्यूम की जगह शैंपू की बोतल मिली थी। मामले की शिकायत मकरोनिया थाने में की गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब हनीट्रैप-2 मामले में गिरफ्तारी के बाद पुराने विवाद भी फिर चर्चा में आ गए हैं। जांच एजेंसियां रेशू चौधरी के पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और राजनीतिक संपर्कों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।