नौ महीने तक तबादला आदेश टालते रहे अफसर, अब जीएडी ने एकतरफा किया रिलीव; नहीं माने तो रुकेगा वेतन !

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भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले के बाद भी नई पदस्थापना पर जॉइन नहीं करने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को एकपक्षीय रूप से कार्यमुक्त कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब तबादला आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और यदि वे नई जगह कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो उनका वेतन भी रोका जा सकता है।

जानकारी के अनुसार अगस्त 2025 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के कई अधिकारियों के तबादले किए गए थे। नियमों के मुताबिक अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार संभालना था, लेकिन कुछ अधिकारी लगभग नौ महीने तक पुराने स्थानों पर ही जमे रहे। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई बल्कि कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य संचालन भी प्रभावित होने लगा।

स्थिति गंभीर होने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को 20 मई 2026 से प्रभावी मानते हुए एकतरफा रिलीव करने के आदेश जारी कर दिए। विभाग का कहना है कि तबादला आदेश शासन की प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर जारी किए जाते हैं और उनका पालन करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

जीएडी द्वारा जारी आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल नई पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जॉइनिंग के बाद उसकी सूचना विभाग को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।

सूत्रों के अनुसार जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है उनमें अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को भी निर्देश दिए हैं कि यदि आदेश के बावजूद अधिकारी पुराने स्थान पर कार्य करते पाए जाते हैं तो उनका वेतन आहरित न किया जाए।

प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सरकार की अनुशासनात्मक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक तबादला आदेश लंबित रहने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा था। कई जिलों में जिम्मेदार पद खाली पड़े थे, जबकि कुछ अधिकारी पुराने स्थानों पर बने रहने के लिए प्रयासरत थे।

जिन अधिकारियों को एकतरफा रिलीव किया गया है उनमें रोहन कुमार प्रमुख हैं। उनका प्रमोशन होने के बाद उन्हें संयुक्त कलेक्टर बड़वानी से अपर कलेक्टर अलीराजपुर पदस्थ किया गया था, लेकिन वे लंबे समय तक पुराने स्थान पर ही कार्यरत रहे।

इसी प्रकार प्रियंक भारद्वाज डेहरिया का तबादला डिप्टी कलेक्टर सागर से डिप्टी कलेक्टर छतरपुर किया गया था। बावजूद इसके उन्होंने नई जगह समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

इसके अलावा संतोष मुदगल को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर रायसेन से प्रभारी उप संचालक सामाजिक न्याय ग्वालियर पद पर भेजा गया था। वहीं राकेश कुमार चौधरी का तबादला प्रभारी डिप्टी कलेक्टर कटनी से प्रभारी डिप्टी कलेक्टर रीवा किया गया था।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी व्यक्तिगत कारणों, राजनीतिक संपर्कों या स्थानीय प्रभाव के चलते लंबे समय तक पुराने जिलों में बने रहना चाहते थे। हालांकि शासन अब इस तरह की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के मूड में दिखाई दे रहा है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि तबादला व्यवस्था शासन के संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि अधिकारी मनमाने तरीके से आदेशों का पालन नहीं करेंगे तो शासन व्यवस्था कमजोर होगी और प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित होगा।

इस कार्रवाई के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा के अन्य अधिकारियों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिन अधिकारियों ने अब तक तबादला आदेशों का पालन नहीं किया है, उन पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई हो सकती है।

सरकार के इस कदम को प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह साफ संकेत दिया गया है कि शासन के आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्थिति में राहत नहीं मिलेगी।

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