छतरपुर। Chhatarpur जिले के लवकुशनगर स्थित महाविद्यालय में स्नातक परीक्षा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बीकॉम द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा तय समय से पहले सुबह आयोजित कर ली गई, जिसके कारण 7 छात्र-छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गए। इस घटना ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय द्वारा जारी टाइम टेबल में परीक्षा का समय दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक निर्धारित किया गया था। छात्र-छात्राएं इसी समय के अनुसार परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें यह जानकारी दी गई कि परीक्षा सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच पहले ही संपन्न कराई जा चुकी है। यह सुनकर छात्र स्तब्ध रह गए और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
पीड़ित छात्र-छात्राओं का कहना है कि परीक्षा समय में बदलाव की कोई सूचना उन्हें पहले से नहीं दी गई थी। छात्रा कुमुद सिंह ने आरोप लगाया कि यदि समय परिवर्तन की जानकारी दी जाती, तो वे निश्चित रूप से परीक्षा में शामिल हो पाते। परीक्षा से वंचित रहने वालों में वंदना पांडे, वालेन्द्र सिंह, शिवम यादव, जयम यादव, नीशू और नेहा अहिरवार सहित कुल 7 छात्र शामिल हैं।

इस मामले में महाविद्यालय के प्राचार्य एस.सी. अहिरवार ने भी लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के टाइम टेबल में परीक्षा का समय दोपहर 2 से 4 बजे ही अंकित था, लेकिन प्रश्नपत्र के कवर पर सुबह 9 से 11 बजे का समय लिखा होने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी भ्रम में परीक्षा सुबह ही आयोजित कर ली गई।
हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह केवल “भ्रम” नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। छात्रों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर पुनः परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना उनकी गलती के उनका एक महत्वपूर्ण पेपर छूट गया, जिससे उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है।
घटना के बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आया है। प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन से बातचीत कर छात्रों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि प्रभावित छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जा सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है। इससे न केवल छात्रों का मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। परीक्षा समय और संबंधित जानकारी को लेकर स्पष्ट और समय पर सूचना देना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि संचार की कमी और समन्वय की विफलता किस प्रकार छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोहराई न जाएं।
फिलहाल सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। प्रभावित छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनके लिए पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी, ताकि उनके शैक्षणिक भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।